मैं हमेशा एक एडवेंचर कैम्प खोलना चाहता था: जीवन डंगवाल

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“जब मैंने 2010 में अपना पहला एडवेंचर कैंप शुरू किया तो मेरे पिता इतने गुस्से में थे कि उन्होंने मुझसे दो साल तक बात नहीं की,” 36 वर्षीय जीवन डंगवाल उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामगढ़ ब्लॉक के सुनकिया गाँव में स्थित अपने कैम्प सुनकिया में बताते हैं। जीवन के पिता किशन सिंह इसीलिए ग़ुस्सा थे क्योंकि उन्हें लगता था की कैम्प खोलना सफल नहीं होगा और अपने सपने का पीछा करने के लिए जीवन ने अपनी बैंक से सारा पैसा निकाल लिया और ऋण के लिए भी आवेदन दिया।

जीवन जो की दसवीं कक्षा में फेल हुए थे जोखिम लेने से कभी नहीं डरे। अपने कैम्प में बेर और आड़ू के बाग से घिरे एक तंबू में बैठकर वह बताते हैं कि उन्होंने कभी भी शिक्षा पूरी करने की कोशिश नहीं की क्योंकि वह जीवन में जो हासिल करना चाहते है उसे पाने में शिक्षा ज्यादा मदद नहीं करती है।

जीवन मुख्य रूप से कृषि परिवार से आते हैं और अपने दो एकड़ खेत में वो सेब, आड़ू, बेर, नाशपाती, खुबानी, आलू, मटर, फूलगोभी, राजमा आदि उगाते हैं। अपने बड़े भाई हरीश सिंह — जो सरगखेत, मुक्तेश्वर, में कैंप पर्पल के पास स्थित एक होटल में कुक के रूप में काम करते थे — से मिलने अक्सर जीवन जाया करते थे। बाद में, उन्होंने एक दशक तक इस कैम्प में काम किया और यहाँ काम करते हुए उन्होंने नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग, उत्तरकाशी में बुनियादी और अग्रिम पाठ्यक्रमों में और राज्य भर में वन्यजीव और पर्यटन पर विभिन्न कार्यशालाओं में भाग लिया।

वहां काम करते हुए जीवन ने जोखिम-भरे खेलों को एक शौक के रूप में विकसित किया और इससे जुड़े व्यापार की बारीकियों को सीखा। 16 साल की उम्र में, जब उन्होंने अपनी 10 वीं की परीक्षा दी थी, तब उन्होंने अल्मोड़ा में स्थित पूर्वांचल अकादमी की प्रिंसिपल मधु खाती से संपर्क किया और अपने छात्रों को उनके कैम्प में भेजने की गुज़ारिश की। उन्होंने पूर्वांचल और अन्य विद्यालयों को अपने छात्रों को सात ताल, रामनगर आदि में कैम्पिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए भेजने के लिए राज़ी कर लिया। “एडवेंचर कैम्प के क्षेत्र में काम करने वाला हर कोई जानता है कि ग्राहकों के रूप में स्कूल को मनाना बेहद मुश्किल है,” गर्व से वो बताते हैं।

2010 में उन्होंने धनाचुली में एक घने जंगल में वनवास नाम से एक कैम्प खोलने का फैसला किया। इसे स्थापित करने के लिए उन्होंने तीन टेंट खरीदने के लिए पैसे उधार लिए। प्रत्येक टेंट में बिस्तर आदि थे जिनकी लागत लगभग 70,000 रुपये थी। चूँकि शुरू में पर्यटक ज़्यादा नहीं आ रहे थे, उन्होंने पैसे कमाने के लिए दूसरे कैम्प में काम किया और उनके भाई ने पास के एक होटल में काम किया।

एक बार कैम्प वनवास पंकज वाधवा, जो उत्तराखंड में उद्यमिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे थे, आए थे। जीवन की उद्यमिता की यात्रा से वाधवा काफी प्रभावित हुए क्योंकि मुट्ठी भर स्थानीय लोग ही इस क्षेत्र में हैं और वह बहुत हाई कम ख़र्च में अपना काम कर रहे थे।

2016 में जब पंकज ने कुमाऊं क्षेत्र के ग्रामीण इलाक़ों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए उद्यम की स्थापना करने का फैसला किया, तो उन्होंने डंगवाल से इस कार्यक्रम का प्रचार करने में मदद करने और उद्यमियों का चयन करने में मदद करने के लिए संपर्क किया। ” प्रचार से सम्बंधित जनता से पहली मुलाकात सुनकिया में हुई,” पंकज गर्व से याद करते हुए बताते हैं।

लेकिन जब पहले कॉहोर्ट के लिए प्रचार चल रहा था तब स्थानीय प्रशासन ने मेहमानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जीवन को अपने वनवासी शिविर को घने जंगल से स्थानांतरित करने के लिए कहा। इसीलिए 2017 में कैंप सुनकिया की स्थापना करने, और फिर काम दोबारा शुरू करने के लिए, ऊहोने उद्यम से ऋण के लिए आवेदन किया।

नए कैम्प में जीवन ने पहाड़ी इलाक़ों में साइकिल चलाना, लंबी दूरी तक पैदल यात्रा, रॉक स्पोर्ट्स, रैपलिंग, जमरिंग, बोल्डरिंग, स्विमिंग, क्लिफ जंपिंग, सीढ़ी की चढ़ाई, ज़िपलाइन और तीरंदाजी जैसे खेलों की सुविधाओं को भी देना शुरू किया। वह संगठनों के लिए नेतृत्व कार्यक्रमों को लेने के लिए और अंतरिक्ष को देखने के लिए दिल्ली से पेशेवर लोगों को भी आमंत्रित करतें है।

डंगवाल उद्यम के प्रति आभारी हैं क्योंकि न सिर्फ़ इसलिए कि जब उन्हें आर्थिक मदद की सबसे ज्यादा जरूरत थी तब उन्हें वो मिली बल्कि इसीलिए भी की उन्हें पंकज एवं अन्य विशेषज्ञों से सलाह लेने का अवसर मिला।

“पंकज हमेशा हमें अपने कौशल को बढ़ाने और अपने व्यवसाय का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करतें हैं, लेकिन हम संसाधन की कमी के कारण इस सुझाव पर कभी कभी अमल नहीं कर सकते हैं। वे मार्केटिंग में भी हमारी मदद करते हैं और अक्सर मेहमानों को हमारे कैम्प में भेजते हैं,” जीवन बताते हैं।

अपने भविष्य की योजनाओं और लक्ष्यों के बारे में पूछे जाने पर जीवन कहते हैं, “हम विस्तार करने से पहले अथिथियों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं। इस दिशा में, हम तम्बूओं के ऊपर एक घास की छत बिछाना चाहते हैं ताकि हम साल भर अतिथियों को रुका सकें। इसके अलावा, यह छत तम्बू को भी दोगुने साल चलाएगा। मैं सुनकिया में छोटी और लंबी अवधि के लिए होमेस्टे की श्रृंखला बनाने पर भी काम कर रहा हूं। अगर मुझे और समय मिलता है, तो मैं भविष्य में वन संरक्षण और वन्यजीवों पर भी काम करना चाहता हूं। ”

साल के व्यस्ततम समय के दौरान मेहमानों की देखरेख करने के लिए उन्होंने 15 लोगों को नियुक्त किया है। पिछले दो वर्षों में उन्होंने 800 से अधिक मेहमानों — जिनमें छात्र, कॉर्पोरेट के कर्मचारी और परिवारों की मेजबानी की है — इससे उन्हें समय से बहुत पहले ऋण को चुकाने में भी मदद मिली है।

“भगवान की कृपा से, परिवार खुश है और मेरे बच्चों को भी जोखिम-भरे खेलों में रुचि हैं,” डंगवाल गर्व से कहते हैं और मुस्कुराना बंद नहीं कर पाते।